
मोरबी गुजरात दिनांक २०.११.२५
रिपोर्ट- आफताब बुखारी

इतिहास में पहली बार किसी करेंसी सिक्के पर भारत माता की तस्वीर बनी है। RSS के सौ साल पूरे होने के मौके पर जारी यह सिक्का आज मोरबी के स्वयंसेवक और कलेक्टर एडवोकेट मितेश दवे के पास पहुंचा
जो पहली बार है जब गुजरात में किसी ने इसे निजी तौर पर हासिल किया है। कलेक्टर एडवोकेट मितेश दवे ने भी यह सिक्का अपने निजी संग्रह के लिए हासिल किया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी यह खास स्मारक सिक्का पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। सिक्के की खास बात यह है कि इस पर पहली बार भारत माता की तस्वीर है, जो इसे न सिर्फ संग्रह करने वाली वस्तु बनाती है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक भी बनाती है। सिक्का संग्रहकर्ता एडवोकेट मितेश दवे ने बताया कि यह भारत के इतिहास में पहला ऐसा सिक्का है, जो राष्ट्रीय भावना और मातृभूमि के प्रति सम्मान दोनों को दर्शाता है। यह सिक्का सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक अमूल्य खजाना है। इस सिक्के की पैकेजिंग भी 1964 के बाद जारी सभी सिक्कों में अनोखी है। इसे किताब के रूप में पेश किया गया है, जो पहली बार है। गुजरात के मोरबी के रहने वाले एडवोकेट मितेश दवे ने बताया कि जैसे ही यह सिक्का जारी हुआ, देश भर के करेंसी प्रेमियों में इसे पाने की होड़ मच गई। 40 ग्राम शुद्ध चांदी का यह स्मारक सिक्का खास तौर पर वित्त मंत्रालय की टकसाल में बनाया गया है और सीमित संख्या में जारी किया गया है। इसके एक तरफ अशोक का चिह्न है और दूसरी तरफ भारत माता की तस्वीर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिह्न की भावनात्मक छवि है, जो देशभक्ति की अद्भुत झलक पेश करती है। इसके साथ ही एडवोकेट मितेश दवे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर जारी एक डाक टिकट भी अपने कलेक्शन में जोड़ा है।























